Structural identification of a cryptic target for drug discovery against urinary tract infections

Atomic-resolution structure of YadV, a usher chaperone from Uropathogenic E. coli (PDB id 5GHU). Crystal structure was determined by Nishant Kumar Pandey (Left). Ms. Garima Verma and Dr. Gajraj Singh Kushwaha performed MD simulations (Right)
1.63 Å crystal structure of a usher chaperone from Uropathogenic E. coli (PDB id 5GHU)

Urinary tract infections (UTIs) are the most common and recurrent bacterial infections worldwide and are a major cause of morbidity. More than 150 million people worldwide are affected by UTIs. Gram-negative bacteria called Uropathogenic Escherichia coli (UPEC) is the primary pathogen that cause UTI. Adhesion of bacterial cell to human cell is primary requisite for bacterial pathogenesis, which is mediated by number of fibrilar and non-fibrilar adhesin molecule produced by bacteria. Fibrilar adhesin are named as fimbriae or pili and plays important role in inter-bacterial adhesion which leads to bacterial aggregation subsequently further colonisation and biofilm formation. Biofilm formation helps bacteria to evade host immune response, better survival in stress conditions and provides resistance to anti-microbial molecules and antibiotics. This is considered main reason for recurrent infection and is attributed to fimbriae assisted adhesion. Therefore, it is necessary to block adhesion by identifying new targets and developing new drugs against those targets.  

There are helper protein molecules called chaperone proteins, which are necessary for synthesis of these fimbriae or pili. However, the exact mechanism fimbriae or pili biogenesis is still not fully understood. In this study we have determined 1.63 Å crystal structure of one such helper protein called YadV chaperone protein, which helps in synthesis Yad pili. The monomeric structure looks like a boomerang shape with N-terminal arm having immunoglobulin (Ig) like fold and C-terminal arm has β-barrel fold. Interestingly for the first time proline lock in the closed conformation has been observed in the structure of Yadv determined by us. Although the closed lock state, which is a resting state of the molecule has been proposed for all types of UPEC pili chaperone still it was not observed previously.  Using molecular dynamics simulations we explained the opening and closing of the flexible proline lock. The proline-proline lock plays an important role in the chaperone-mediated subunit assembly, which is found in an open conformation in chaperone-subunit complex while we observed the closed conformation in subunit free structure. The observation of the closed conformation, a cryptic state, likely to be important target for design and discovery of pilicide that could bind to proline lock and maintain the lock in a closed conformation. This will lead to abolishment of pilus biogenesis that will block adhesion of UPEC to human cell. We have already shortlisted few inhibitors targeting this site on YadV. 

The work was supported by a grant from the Basic Research in Modern Biology task force of Department of Biotechnology, Government of India.

Trivia: The name of protein changed from EcpD to YadV during the course of studies. Further, the structure prediction tools have predicted it to be a eight-stranded β-barrel protein and most even predicting to be an Outer Membrane Protein (OMP) (see below figure for one of the wrong prediction).

Therefore, we cloned it without signal sequence and expressed tag-free expecting to over-express as inclusion bodies. But the protein over-expressed as soluble, in large amount and as monomer in solution. All these and final structure proved the structure prediction completely wrong.

मूत्र पथ के संक्रमण के खिलाफ दवा की खोज के लिए एक गुप्त लक्ष्य की संरचनात्मक पहचान

मूत्र पथ के संक्रमण (यू.टी.आई.) दुनिया भर में सबसे आम और आवर्तक जीवाणु संक्रमण हैं और रुग्णता का एक प्रमुख कारण है। दुनिया भर में १५ करोड़ से अधिक लोग यू.टी.आई. से प्रभावित होते हैं। यूरोपैथोजेनिक एस्चेरिचिया कोलाई (यू.पी.ई.सी.) नामक ग्राम-नकारात्मक जीवाणु प्राथमिक रोगज़नक़ है जो यू.टी.आई. का कारण बनता है। जीवाणु कोशिका का मानव कोशिका में आसंजन जीवाणु द्वारा रोगजनन के लिए प्राथमिक रूप से आवश्यक है, जो जीवाणु अपने द्वारा उत्पादित बहुत से तंतुमय और गैर-तंतुमय चिपकने वाले अणुओं की सहायता से करता है। तंतुमय आसंजन को फ़िम्ब्रिया या पिली के रूप में जाना जाता है और यह अंतर-जीवाणु आसंजन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । तत्पश्चात यह जीवाणु का एकत्रीकरण करता है जिससे बायोफ़िल्म का गठन होता है और औपनिवेशीकरण अग्रसित होता है । बायोफ़िल्म गठन जीवाणु को मानव प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया से बचने में मदद करता है, तनाव की स्थिति में अपना अस्तित्व बनाये रखने में सहायक होता है और जीवाणु-विरोधी अणुओं और प्रतिजैविक दवाओं से प्रतिरोध प्रदान करता है। यह आवर्तक संक्रमण का मुख्य कारण माना जाता है और यह फ़िम्ब्रिया सहायित आसंजन के लिए जिम्मेदार है। इससे निपटने के लिए नए लक्ष्यों की पहचान कर उन लक्ष्यों के विरुद्ध नई दवाओं को विकसित करके आसंजन को अवरुद्ध करना आवश्यक है।

यद्यपि, फ़िम्ब्रिया या पिली जीवजनन प्रक्रिया को अभी तक सटीक तरीके से समझा नहीं गया है परन्तु एक विशेष प्रकार के सहायक प्रोटीन अणु जिन्हें चपेरोन प्रोटीन कहा जाता है वे इन फ़िम्ब्रिया या पिली के संश्लेषण के लिए अत्यावश्यक होते हैं। इस अध्ययन में हमने एक ऐसे चपेरोन प्रोटीन जिसे याड-५ चपेरोन प्रोटीन कहा जाता है, जो याड पिली को संश्लेषण करने में मदद करता है, की परमाणु-स्तर की स्फटिक संरचना का निर्धारण किया है।एकल संरचना बूमरैंग शेप की तरह दिखती है, जिसका एन-टर्मिनल इम्युनोग्लोबुलिन (आई.जी.) जैसी संरचना है तथा सी-टर्मिनल β-बैरल बनाता है। दिलचस्प बात यह है कि हमारे द्वारा निर्धारित याड-५ की संरचना में पहली बार प्रोलिन ताले को बंद स्थिति में देखा गया। यद्यपि प्रोलिन ताले की बंद स्थिति, जो प्रोटीन की एक विश्राम अवस्था है, को यू.पी.ई.सी. के सभी प्रकार के पिली चैपरोन के लिए प्रस्तावित किया गया है, फिर भी हमारे शोध से पहले कभी नहीं देखा गया था। इस अध्ययन में आणविक गतिशीलता अनुकरण का उपयोग करते हुए हमने लचीले प्रोलिन ताले के खुलने और बंद होने की प्रक्रिया को स्पष्ट रूप समझाया है। चपेरोन प्रोटीन की सहायता से विभिन्न पृथक इकाईयों की क्रमबद्ध संजोने की प्रक्रिया में प्रोलिन-प्रोलिन ताला एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है, जहाँ ये चपेरोन प्रोटीन और पृथक इकाई की मिश्रित जुड़े हुए अवस्था में एक खुली स्थिति में पाया जाता है, जबकि हमने पृथक इकाई से मुक्त संरचना में इसे बंद स्थिति में पाया है। बंद संरचना का अवलोकन, जो इस प्रकार के प्रोटीन की एक गुप्त स्थिति है, हमें नए प्रकार दवाओं के खोज और संश्लेषण के लिए एक महत्वपूर्ण लक्ष्य बनने की संभावना प्रदान करता है। ऐसी नयी दवाईयाँ इस ताले को बंद करने और बंद स्थिति में रखने के लिए बाध्य कर सकती हैं। इससे पिली जीवजनन प्रक्रिया का उन्मूलन होगा जो मानव कोशिका में यू.पी.ई.सी के आसंजन को अवरुद्ध करेगा। हमने याड-५ पर स्थित इस जगह को लक्षित करने वाले कुछ अवरोधकों को चयनित कर लिया है।

यह शोध आधुनिक जीव विज्ञान में मूलभूत अनुसंधान कार्य बल, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार के एक अनुदान से समर्थित है।

रोचक जानकारी: अध्ययन के दौरान प्रोटीन का नाम ई.सी.पी.डी. से याड-५ में बदल गया। इसके अलावा, संरचना की भविष्यवाणी के तरीकों ने इसे आठ-फंसे वाले β-बैरल प्रोटीन होने का अनुमान लगाया था और बहुतों ने तो इसे बाह्य झिल्ली प्रोटीन होने की भविष्यवाणी की थी (गलत भविष्यवाणी वाला चित्र नीचे देखें)।

इसलिए, हमने इसे संकेतित दिशानिर्धारण अनुक्रम के बिना और टैग-मुक्त क्लोन किया जिससे प्रोटीन का अधिक उत्पादन थक्के के रूप उम्मीद थी। परन्तु प्रोटीन का उत्पादन घुलनशील अवस्था में हुआ और वह घोल में एकलरुपी था। इन सभी परिणामों और इस प्रोटीन संरचना ने भविष्यवाणी को पूरी तरह से गलत साबित कर दिया।


  1. Pandey NK, Verma G, Kushwaha GS, Suar M and Bhavesh NS (2020) Crystal structure of the usher chaperone YadV reveals a monomer with the proline lock in closed conformation suggestive of an intermediate state. FEBS Lett.. 594, 3057-3066.
  2. Structure co-ordinates: Protein Data Bank (PDB) accession numbers 5GHU.

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

This site uses Akismet to reduce spam. Learn how your comment data is processed.